
आज के समय में लिखना आसान हो गया है, लेकिन सार्थक लिखना कठिन।
शब्द पहले भी थे, भाव पहले भी थे, लेकिन आज उनकी गति बदल गई है। हर चीज़ जल्दी कही जा रही है, जल्दी पढ़ी जा रही है, और जल्दी भूल भी जा रही है।
ऐसे समय में यह प्रश्न और भी महत्वपूर्ण हो जाता है —
सार्थक कविता कैसे लिखी जाए?
1. पहले महसूस करें, फिर लिखें
सार्थक कविता का जन्म शब्दों से नहीं, अनुभव से होता है।
जब तक कोई भाव भीतर गहराई से नहीं उतरता, वह कविता नहीं बनता।
कई लोग पहले लिखते हैं और बाद में अर्थ खोजते हैं।
लेकिन सच्ची कविता में अर्थ पहले आता है, शब्द बाद में।
अपने भीतर के अनुभवों को समय दें।
उन्हें तुरंत लिखने की जल्दी न करें।
2. कम शब्द, अधिक अर्थ
अक्सर हम सोचते हैं कि लंबी कविता अधिक प्रभावशाली होती है।
लेकिन इतिहास बताता है कि कई बार एक पंक्ति पूरी जिंदगी के साथ चलती है।
सार्थक कविता में शब्द कम होते हैं, लेकिन उनका वजन अधिक होता है।
हर शब्द की जिम्मेदारी होती है।
अपने लिखे को बार-बार पढ़ें और अनावश्यक शब्दों को हटाएँ।
जो बचता है, वही कविता के करीब होता है।
3. समझाने की नहीं, संकेत देने की कला
सार्थक कविता पाठक को आदेश नहीं देती, उसे सोचने के लिए आमंत्रित करती है।
वह हर बात स्पष्ट नहीं करती।
कविता में जगह होनी चाहिए —
जहाँ पाठक अपने अर्थ भर सके।
यदि सब कुछ स्पष्ट है, तो कविता समाप्त हो जाती है।
यदि कुछ अनकहा है, तो कविता जीवित रहती है।
4. धैर्य और अनुशासन
कविता केवल भावनाओं का परिणाम नहीं, अनुशासन का भी परिणाम है।
लिखना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है प्रतीक्षा करना।
कई बार एक कविता महीनों तक अधूरी रहती है।
लेकिन वही प्रतीक्षा उसे गहराई देती है।
5. अपने समय को समझें
हर युग की अपनी बेचैनी होती है।
आज का समय शोर, तुलना और त्वरित प्रतिक्रिया का समय है।
सार्थक कविता इस शोर के विरुद्ध एक शांत प्रतिरोध है।
यह पाठक को धीमा करती है, उसे स्वयं से मिलाती है।
CSV Poetry का दृष्टिकोण
CSV Poetry का उद्देश्य केवल कविताएँ प्रकाशित करना नहीं है,
बल्कि एक ऐसा मंच बनाना है जहाँ कविता को समय और सम्मान मिले।
हम ऐसी कविताओं को महत्व देते हैं जो
गहराई, सादगी और ईमानदारी से जन्म लेती हैं।
यहाँ कविता प्रदर्शन नहीं, अनुभव है।
यहाँ शब्द सजावट नहीं, साक्ष्य हैं।
समापन विचार
सार्थक कविता लिखना किसी तकनीक का परिणाम नहीं,
एक यात्रा है — भीतर की यात्रा।
यदि आप सचमुच लिखना चाहते हैं,
तो पहले सुनना सीखें।
अपने भीतर की आवाज़ को।
क्योंकि सबसे अच्छी कविताएँ वही होती हैं,
जो पहले कवि को बदलती हैं।